#Rio: 10 बातें- जिन पर टिकी थी भारत की मेडल की उम्मीदें, 10 वजहें- आखिर क्यों नहीं मिली हमारे एथलीट्स को कामयाबी?

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नई दिल्ली. रियो ओलिंपिक को खत्म होने में अब सिर्फ 8 दिन बचे हैं, लेकिन भारत को अभी तक एक भी मेडल नहीं मिला है। 31th ओलिंपिक में भारत अभी तक खाता भी नहीं खोल पाया है। यूएस, चीन जैसे देशों की तरह अपने को ‘पावरफुल’ आंकने के बावजूद भारत फिसड्डी साबित हो रहा है। बीजिंग में 3 और लंदन में 6 मेडल जीतने वाले भारत को इस बार अपने 119 खिलाड़ियों से 19 मेडल की उम्मीद थी, जो अब संभव होता नहीं दिख रहा। अधिकतर अपने इवेंट में हारकर बाहर हो चुके हैं। 10 रीजन जिनसे थी मेडल की उम्मीद…
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1. टारगेट अोलिंपिक पोडियम स्कीम
– मिनिस्ट्री ऑफ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स ने नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड के तहत ‘टारगेट अोलिंपिक पोडियम (TOP) स्कीम’ की शुरुआत की थी।
– 100 एथलीट्स के लिए 45 करोड़ अलॉट किया गया था। एथलीट्स पर 30 लाख से लेकर डेढ़ करोड़ रुपए तक खर्च किए गए।
2. एथलीट्स के पीछे खर्च
– एथलीट्स पर एनुअल कैलेंडर ऑफ ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटीशन्स के तहत खुलकर पैसे खर्च किए गए।
– पहली बार विदेशों में ट्रेनिंग-कोचिंग के लिए भेजा गया। दो साल में 180 करोड़ खर्च किए गए।
3. फैसिलिटीज और टेक्निकल सपोर्ट
– ओलिंपिक 2012 से अब तक स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) सेंटर्स में सुविधा और टेक्नीक के मामले में बड़ा बदलाव हुआ है।
– एंटी-ग्रैविटी ट्रेडमिल, hypoxic चेंबर, न्यूरोट्रैकर्स जैसी मशीनें लगाई गई। साइंटिफिक तरीके से प्रैक्टिस कराई गई।
4. कम किए गए मैनेजरियल स्टाफ
– रियो ओलिंपिक में एथलीट्स के साथ टेक्नीकल ऑफिशियल्स जैसे पर्सनल कोच, फिजियो, ट्रेनर्स भेजे गए।
– खिलाड़ियों को सुविधा ज्यादा मिले इसलिए मैनेजरियल स्टाफ कम किए गए।
5. तैयारी की लगातार की गई मॉनिटरिंग
– साई ने मिशन ओलिंपिक सेल बनाया। इसके जरिए खेल और खिलाड़ियों को सुविधा आदि पर नजर रखी गई।
– इसमें इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन, चीफ नेशनल कोच और पूर्व ओलिंपिक खिलाड़ियों को जोड़ा गया।
6. पर्सनल ट्रेनर-कोच रखने की इजाजत
– एथलीट्स को विदेशों में या नेशनल कैम्पस में प्रैक्टिस के लिए पर्सनल कोच, इंस्ट्रक्टर, ट्रेनर्स, फिजियो और सपोर्ट स्टाफ रखने की इजाजत दी गई।
– एथलीट्स के लिए 40 विदेशी कोच, एक्सपर्ट्स लगाए गए।
7. प्रैक्टिस के लिए पहले भेजा गया
– पहले ओलिंपिक में खिलाड़ियों को गेम शुरू होने के दो-तीन दिन पहले भेजा जाता था।
– इस बार माहौल से तालमेल बैठाने के लिए 15-20 दिन पहले भी भेजा गया।
8. खिलाड़ियों की दी गई तगड़ी खुराक
– इस बार हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों की खुराक और तगड़ी की गई।
– प्रत्येक दिन 450 रुपए खर्च को 650 रुपए तक किया गया।
– फूड सप्लीमेंट्स चार्ज को 300 से बढ़ाकर 700 रुपए प्रतिदिन किया गया।
9. हॉकी खिलाड़ियों को भी मिला स्कीम का लाभ
– मेन और वुमन हॉकी दोनों का सिलेक्शन हुआ। ये टीओपी स्कीम में नहीं आते थे। फिर भी उन्हें सुविधाएं दी गईं।
– पहली बार बाकी एथलीट्स की तरह हॉकी खिलाड़ियों को भी पॉकेट अलाउंस दिया गया।
10. खिलाड़ियों को पूरा सपोर्ट
– रियो में गए 119 खिलाड़ियों के लिए हर संभव तैयारियां कराई गईं।
– विवाद के बाद भी नरसिंह यादव जैसे खिलाड़ियों का सरकार ने खुलकर सपोर्ट किया।
– नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी। रियो शुरू होने से पहले दिल्ली समेत देशभर में #RUNFORRIO रैली निकाली गई।

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