उड़ी हमले पर मोदी ने की मीटिंगः सरकार का फैसला- इंटरनेशनल लेवल पर PAK को अलग-थलग कर दिया जाएगा

Kashmir
उड़ी.यहां आर्मी ब्रिगेड हेडक्वार्टर हमले के बाद दिल्ली में हाईलेवल मीटिंग का दौर चला। पहली मीटिंग राजनाथ सिंह ने आलाअफसरों के साथ ली। इसके बाद राजनाथ, कई मंत्री और अफसरों ने नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग की। उन्हें हमले और उसके बाद की कार्रवाई की जानकारी दी गई। भारत ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि पाकिस्तान को इंटरनेशनल लेवल अलग-थलग कर दिया जाएगा। इस बीच मनोहर पर्रिकर ने 18 जवानों की कुर्बानी का बदला लेने के ऑर्डर दिए हैं। ये सवाल भी उठ रहा है कि क्या सरकार आतंकियों के खिलाफ वैसी ही कार्रवाई करेगी जैसी म्यांंमार सीमा में घुसकर की थी। आतंक से लड़ाई पर 120 देशों के बीच अकेला पड़ा PAK…
– आतंकके खिलाफ पाकिस्तान का दोहरा चरित्र गुटनिरपेक्ष आंदोलन (नाम) में भी उजागर हो गया। उसने नाम के सम्मेलन में आतंक निरोधक कार्यसमूह बनाने के भारत के प्रस्ताव का विरोध किया। सम्मेलन के ऑफिशियल स्टेटमेंट में भारतीय प्रस्ताव का जिक्र तो नहीं हुआ। लेकिन मेजबान वेनेजुएला समेत ज्यादातर देश इसके पक्ष में खड़े नजर आए। पाकिस्तान का साथ किसी ने नहीं दिया। नाम में 20 देश हैं।
– वहीं भारत ने साफ कर दिया है कि सितंबर में होने वाले यूएन जनरल असेंबली की मीटिंग में पाक के खिलाफ घेराबंदी की जाएगी। मीटिंग में फॉरेन मिनिस्टर सुषमा स्वराज और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर जा रहे हैं।
– नवंबर में पाकिस्तान में होने वाले सार्क समिट में मोदी जाएंगे या नहीं, इस पर फैसला नहीं हुआ है।
राम माधव बोले- एक दांत के बदले एक जबड़ा
– बीजेपी नेता राम माधव ने कहा- ”पीएम ने वादा किया है कि उड़ी आतंकी हमले के पीछे जो भी लोग हैं, वे सजा से नहीं बच पाएंगे। यह अगला रास्ता होना चाहिए। एक दांत के लिए पूरा जबड़ा।”
– रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे के मुताबिक, ‘हाईलेवल मीटिंग जारी है। ये पक्का है, घटना के बाद कड़ा जवाब दिया जाएगा। पूरा देश सदमे में है। हमारे कई जवान शहीद हुए हैं। कायरतापूर्ण की गई इस कार्रवाई की हम निंदा करते हैं। जवानों को सैल्यूट है।’
– ‘पूरा देश इस समय एक ही बात कह रहा है। ये वक्त कड़ा जवाब देने का का है।’
– बता दें रविवार सुबह उड़ी में सीमापार से आतंकी सलामाबाद नाले के रास्ते उड़ी में दाखिल हुए थे। आर्मी ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर किए हमले में 17 जवान शहीद हो गए थे।
क्या बोले पर्रिकर?
– पर्रिकर ने कहा, “हमारे 18 बहादुर जवानों ने कुर्बानी दी है। मैं उन्हें सैल्यूट करता हूं। आर्मी चीफ और कमांडर स्थिति पर नजर बनाए रखें। जो हमले के लिए जिम्मेदार हैं, उनपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
– इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि देश को कोई शख्स या संगठन नुकसान पहुंचाता है तो उसे वैसा ही दर्द दिया जाना चाहिए।
– इस बीच एनआईए की टीम भी कश्मीर पहुंच गई है।
क्या बोले मोदी?
– “मैं इस देश के लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि हमले के पीछे जो भी लोग हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।”
– राजनाथ ने कहा था, “हमला करने वाले ट्रेंड थे। पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है, उसे अलग-थलग करना चाहिए।”
क्या म्यांमार जैसी कार्रवाई करेगी केंद्र सरकार?
– इससे पहले पिछले साल जून में आतंकियों ने मणिपुर में सेना के ट्रक पर हमला किया था। इसमें 18 जवान शहीद हुए थे।
– इसके दो दिन बाद सेना ने म्यांमार बॉर्डर के अंदर घुसकर उग्रवादियों को मार गिराया था। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी केंद्र सरकार ऐसा ही फैसला करेगी?
दो-दो बार दी गई थी खुफिया सूचना, फिर भी नहीं रोक पाए हमला
– कश्मीर में 2 महीने से जारी हिंसा के बीच पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकवादी गुटों के हमले की सुरक्षा एजेंसियों को पहले से ही आशंका थी।
– इंटेलिजेंस ने ईद पर उड़ी और श्रीनगर में बड़े हमले का अलर्ट जारी किया था। ईद पर कड़ी सुरक्षा के चलते आतंकी कुछ नहीं कर पाए।
– 15 सितंबर को दूसरी बार फिर आतंकी हमले का अलर्ट जारी हुआ।
– इसके अलावा एक फिदायीन दस्ते के तीन-चार दिन में घुसपैठ करके किसी सिक्युरिटी एस्टैब्लिशमेंट या रिहाइशी इलाके में बड़े हमले की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, मिलिट्री ऑपरेशन डीजी ने कहा कि सभी खुफिया वॉर्निंग गंभीरता से ली जाती हैं।
आर्मी बेस तक कैसे पहुंचे आतंकी?
– मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उड़ी बेस पर घुसे आतंकियों ने 24 से 48 घंटे पहले ही घाटी में घुसपैठ की होगी।
– आतंकी रविवार तड़के 3.30 बजे आर्मी बेस पर पहुंचे। इन्होंने जवानों की अदला-बदली के वक्त का फायदा उठाया और तार काटकर बेस के अंदर दाखिल हुए।
– आतंकियों की संख्या चार से पांच थी। ये दो हिस्सों में बंट गए।
कैसे किया हमला?
– दो हिस्सों में बंटने के बाद आतंकियों ने सबसे पहले कैम्प के अंदर ग्रेनेड फेंका।
– आतंकियों का दूसरा गुट आर्मी बेस के एडमिनिस्ट्रेटिव बैरक में घुसा। वहां उन्होंने फायरिंग की और ग्रेनेड फेंके।
क्यों शहीद हुए जवान?
– आतंकियों ने उन टेंटों काे निशाना बनाया जहां डोगरा रेजीमेंट के जवान ड्यूटी खत्म कर सो रहे थे। आतंकियों ने लगातार ग्रेनेड फेंके। इससे कम से कम 10 टेंटों में आग लग गई।
– दावा किया जा रहा है कि इसी आग से झुलसकर 13 जवान शहीद हो गए।
हमले के बाद क्या हुआ?
– बेस के अंदर हेलिकॉप्टर के जरिए पैराकमांडो उतारे गए। इन कमांडोज ने ही हमले के 6 घंटे के अंदर चार आतंकियों को मार गिराया।

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