शिव भक्‍तों के लिए ऐसी कड़ी सुरक्षा कि परिंदा भी पर न मार सके

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जम्मू| अमरनाथ यात्रा दो जुलाई से शुरू होने के बाद अब तक 75,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन किए। 1,726 श्रद्धालुओं का एक अन्य जत्था शुक्रवार को जम्मू से रवाना हुआ। तीर्थयात्रियों का जत्था सुरक्षाबलों की देखरेख में 12 बसों और 28 हल्के वाहनों में रवाना हुआ। इस वार्षिक यात्रा का प्रबंधन देखने वाले श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के एक अधिकारी ने बताया, “दो जुलाई से यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 75,000 से अधिक तीर्थयात्री पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं।”

अमरनाथ यात्रा के रास्‍ते में है कड़ी सुरक्षा

अमरनाथ यात्रा के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। घाटी में आतंकवादी गतिविधियों की वजह से भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और जम्मू एवं कश्मीर पुलिस अमरनाथ यात्रा में यात्रियों की सुरक्षा में मुस्तैद हैं। कश्मीर घाटी में इस साल बढ़ी हुई आतंकवादी गतिविधियों की वजह से यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। समुद्र तल से 3,888 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु उत्तरी कश्मीर में बालटाल तथा दक्षिणी कश्मीर में नुनवान (पहलगाम) आधार शिविरों का इस्तेमाल करते हैं। गांदेरबल जिले में स्थित बालटाल आधार शिविर से श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए 14 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है, पर परंपरागत पहलगाम मार्ग से उन्हें 46 किलोमीटर की लंबी चढ़ाई करनी पड़ती है।

बालटाल आधार शिवर से पवित्र गुफा तक पहुंचने वाले उसी दिन बाबा बर्फानी के दर्शन कर लौट आते हैं, जबकि पहलगाम मार्ग से श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा तक पहुंचने में तीन दिन लगते हैं। बालटाल तथा पहलगाम आधार शिविरों से श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा तक ले जाने और वहां से लाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी है।

मौसम विभाग ने यात्रियों लिए जारी अपने दैनिक बुलेटिन में बताया है कि बालटाल से पवित्र गुफा और पहलगाम से पवित्र गुफा जाने वाले मार्गो में मौसम शुष्क रहेगा। इस साल यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक दो श्रद्धालुओं की जान गई है, लेकिन यह स्वाभाविक मौत बताई गई है। दो जुलाई को शुरू हुई यह यात्रा 17 अगस्त को समाप्त होगी, जब श्रावण मास की पूर्णिमा और रक्षा बंधन है।

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