UN में सुषमा का PAK को करारा जवाब: कहा- आतंकवादियों को पालना कुछ देशों का शौक बन गया है, वो कश्मीर का ख्वाब देखना छोड़ दे

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न्यूयॉर्क. यूएन में पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ की स्पीच के 5 दिन बाद सुषमा स्वराज ने सोमवार को उन्हें करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का है और रहेगा। पाकिस्तान को ख्वाब देखना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कश्मीर में ह्यूमन राइट्स वॉयलेशन होने के पाकिस्तान के आरोपों का भी कड़ा जवाब दिया। कहा- जिनके घर शीशे के हों, उन्हें दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें आतंकवाद से मुकाबले के लिए रणनीति बनानी होगी। यदि कोई देश इस तरह की रणनीति में शामिल नहीं होना चाहे, तो हम उसे अलग-थलग कर देंगे। ऐसे देश बोते भी हैं तो आतंकवाद, बेचते भी हैं तो आतंकवाद, निर्यात भी करते हैं तो आतंकवाद। नरेंद्र मोदी ने यूएन में सुषमा को ग्लोबल मुद्दों को असरदार ढंग से उठाने के लिए ट्वीट कर बधाई दी है। पढ़ें सुषमा की स्पीच के हाईलाइट्स…
– 07:32 PM: ”बहादुर अली तो जिंदा सबूत हैं हमारे पास कि सीमा पार से आतंकवादी आया है। एक चीज बता दूं कि अगर पाकिस्तान ये समझता है कि वह इस तरह की हरकतें करके या भड़काऊ बयान देकर भारत का कोई हिस्सा हमसे छीन सकता है तो मैं पूरी दृढ़ता और स्पष्टता से कहना चाहती हूं कि आपका ये मंसूबा कभी कामयाब नहीं होगा। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और अभिन्न हिस्सा रहेगा, इसलिए ये ख्वाब देखना छोड़ दें।”
– 07:30 PM: ”हमने शर्तों के आधार पर नहीं, मित्रता के आधार पर सारे मसले सुलझाने की पहल की थी। कभी ईद की शुभकामनाएं। कभी क्रिकेट की शुभकामनाएं। कभी स्वास्थ्य का कुशल-क्षेम। हमने दो बरस में मित्रता का वो पैमाना खड़ा किया जो पहले कभी नहीं था। हमें मिला क्या बदले में? पठानकोट, उड़ी, बहादुर अली? मैं पूछना चाहती हूं- हम शर्तें लगा रहे हैं या आप दूसरी नीयत दिखा रहे हैं?”
– 07:28 PM: ”दूसरी बात उन्होंने कही कि भारत पाकिस्तान पर शर्तें थोप रहा है। मैं पूछना चाहती हूं कि कौन-सी शर्त। किस शर्त की बात की जा रही है? हमारे शपथ ग्रहण से पहले जब हमने आपके प्रधानमंत्री को न्योता दिया था, तो क्या कोई शर्त रखी थी? मैं खुद इस्लामाबाद गई थी कॉम्प्रीहेंसिव बाइलेटरल डायलॉग शुरू करवाने के लिए तो क्या कोई शर्त रखी थी? प्रधानमंत्री मोदी काबुल से दिल्ली आते हुए लाहौर उतर गए थे। कोई शर्त लगाकर गए थे क्या?’’
– 07:24 PM:– सुषमा ने कहा, ”21 तारीख को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इसी मंच से दो बातें कही थीं। उन्होंने कहा था कि कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन हो रहा है। मैं इतना ही कहूंगी कि जिनके अपने घर शीशे के हों, उन्हें दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। एक बार बगल में झांककर देख लें कि क्या हो रहा है बलूचिस्तान में। वहां जो हो रहा है। वे खुद क्या कह रहे हैं वहां। मैं कहना चाहूंगी कि बलूचिस्तान में जो हो रहा है वह यातनाओं की पराकाष्ठा है।’’
– 07:23 PM: “हमें आतंकवाद से मुकाबले के लिए रणनीति बनानी होगी। यदि कोई देश इस तरह की रणनीति में शामिल नहीं होना चाहे, तो हम उसे अलग-थलग कर देंगे। ये देश बोते भी हैं तो आतंकवाद, बेचते भी हैं तो आतंकवाद, निर्यात भी करते हैं तो आतंकवाद। आतंकवादियों को पालना कुछ देशों का शौक बन गया है। उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। यूएन की तरफ से आतंकी करार दिए गए लोग सरेआम जलसे करते हैं। वो देश दोषी हैं जो उन्हें ऐसा करने देते हैं। ऐसे देशों की विश्व समुदाय में जगह नहीं होनी चाहिए।”
– 07:21 PM: “जिस किसी ने भी हिंसक विचारधरा के बीज बोए हैं, उनका बुरा नतीजा हुआ है। मेरा या पराया कहकर, हम जंग को नहीं जीत पाएंगे। आतंकवाद को जड़ से उखाड़ना चाहते हैं तो एक ही तरीका है कि मतभेद भुलाकर एकजुट हों। पुराने समीकरण तोड़ने होंगे। पसंद-नापसंद को भूलना होगा।”
– 07:19 PM: “आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है। क्योंकि वो निर्दोष लोगों को निशाना बनाता है, वह बेगुनाहों को मारता है। इन आतंकियों को पनाह देने वाले कौन हैं। इनका न बैंक है, न फैक्ट्री है। कौन इन्हें सहारा देता है। संरक्षण देता है। ऐसे ही सवाल इस मंच से अफगानिस्तान ने इसी मंच से उठाए थे।”
– 07:18 PM: “इसी महीने इस शहर में हुए 9/11 हमने की आतंकी बरसी थी। हम इस शहर के दर्द को समझते हैं। हम पर भी इन्हीं ताकतों ने आतंकी हमला किया। लेकिन आतंकवाद का शिकार हुए मासूमों के खून और आंसुओं के बावजूद पेरिस, काबुल से लेकर पठानकोट और उड़ी हमला याद दिलाता है कि हम इसे रोकने में सफल नहीं हुए हैं।”
– 07:17 PM: ”इंटरनेशनल सोलर अलायंस का गठन हमारी अभिनव पहल है। मैं इस मंच से विश्वास दिलाती हूं कि भारत जलवायु परिवर्तन के मामले में अग्रणी भूमिका निभाएगा। भारत 2 अक्टूबर को इंस्ट्रूमेंट ऑफ निगोशिएशन जमा करा देगा। 2 अक्टूबर चुना क्योंकि महात्मा गांधीजी की जयंती है।”
– 07:16 PM: सुषमा ने कहा कि योग भारत का वह प्राचीन ज्ञान है। वह टिकाऊ जीवनशैली का सिद्धांत देता है। योग को पिछले दो साल में आप लोगों ने जो रिस्पॉन्स दिया है, उसके लिए भारत आभारी है।
– 07:15 PM: ”जलवायु परिवर्तन एक और ऐसा मुद्दा है जो हमारे गंभीर चुनौती बनकर खड़ा है। हमारे प्रधानमंत्रीजी ने सिद्धांत दिया है- क्लाइमेट जस्टिस। हम मानते हैं कि प्रकृति के साथ हम न्याय करें तो वह हमारी मदद करेगी। नहीं करेंगे तो वह क्रोधित हो जाएगी, अपना रूप दिखाएगी।’’
– 07:12 PM: ”कुछ ऐसे मुद्दों का उल्लेख जरूर करना चाहूंगी जो महत्वपूर्ण है। दुनियाभर के काेने-कोने में फैली गरीबी को हटाना बड़ी चुनौती है। भारत में 25 करोड़ से ज्यादा गरीब लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं। मानवता का 1/6 हिस्सा भारत में रहता है।’’
– 07:10 PM:सुषमा ने कहा, ”एक साल पहले मैंने इसी पवित्र मंच से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्यों को संबाेधित किया था। तब से अब तक काफी परिवर्तन हुआ है। कुछ अच्छा, कुछ बुरा। ये मंच है जहां हम तमाम मुद्दों पर चर्चा की। समीक्षा उन कामों की भी हो, जो हमने किए हैं और उनकी भी जो हम नहीं कर पाएं हैं।’’
– 07:09 PM: सुषमा स्वराज यूएन जनरल असेबली में पहुंचीं।
6.30 बजे से शुरू हुए भाषण
– यूएन जनरल असेंबली में भारतीय समयानुसार शाम 6.30 बजे से भाषण शुरू हो चुके हैं।
– हर लीडर को 10-10 मिनट दिए जाएंगे। सुषमा की स्पीच तीसरे नंबर पर हुई।
मोदी ने कहा था- आतंकियों का भाषण पढ़ने वालों से बात नहीं करेंगे
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान पर सबसे तीखा हमला किया। उड़ी हमले के 7 दिन बाद मोदी ने पड़ोसी देश के हुक्मरानों को सीधे निशाने पर लिया। शनिवार को यहां बीजेपी की रैली में 32 मिनट की स्पीच में उन्होंने 9 बार पाकिस्तान का नाम लिया। मोदी ने तीन बड़े बयान दिए। पहला- आतंकियों के लिखे भाषण पढ़कर कश्मीर के गीत गाने वाले पाकिस्तान के हुक्मरानों से हमें बात नहीं करनी। दूसरा- आतंकी कान खोलकर सुन लें, हमारा देश उड़ी हमले के शहीदों की कुर्बानी कभी नहीं भूलेगा। तीसरा- हमसे हजार साल लड़ने की बात कहने वाले पाक के हुक्मरानों की चुनौती मैं स्वीकार करता हूं।
क्या बोले विदेश राज्य मंत्री?
– एमजे अकबर ने कहा, ‘पाक के पास 1-2 साइंटिस्ट तो होंगे ही। अगर वो चाहें तो आतंकियों के डीएनए सैंपल्स की जांच कर सकते हैं। मुझे यकीन है कि उन्हें पठानकोट और उड़ी हमले के सबूत मिल जाएंगे।’
पिछले साल यूएन में क्या बोले थे नवाज?
– नवाज शरीफ ने यूएन में अपनी स्पीच में भारत के साथ रिश्ते सुधारने की जरूरत बताई थी। साथ ही चार शर्तें भी थोप दी थीं। कहा था- भारत कश्मीर से सेना हटाए। फलस्तीन और कश्मीर में विदेशी दखल खत्म हो। भारत पाकिस्तान में अस्थिरता फैलाना बंद करे, क्योंकि हम खुद आतंकवाद के शिकार हैं। भारत सैन्य ताकत के इस्तेमाल से परहेज करे।
सुषमा ने कैसे दिया था करारा जवाब?
– इस पर सुषमा ने नवाज पर सीधा निशाना साधा। अगले ही दिन अपनी स्पीच में सुषमा ने कहा था- “आपने कल यहीं से चार सूत्रों की बात की थी। चार सूत्रों की जरूरत नहीं है। एक ही सूत्र काफी है। आतंकवाद छोड़िए और बैठकर बात कीजिए।”
– सुषमा ने अपनी स्पीच में सात बार पाकिस्तान और एक बार कश्मीर का नाम लिया था। सुषमा के इस आक्रामक बयान की तारीफ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच ट्वीट किए थे। उन्होंने सुषमा के स्पीच को एक्सीलेंट बताया था।

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