सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जिंदगीभर सरकारी बंगले में नहीं रह सकते Ex CM; राजनाथ-मुलायम समेत 6 को करना होगा घर खाली

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सरकारी बंगला लेने के हकदार नहीं हैं। अगर कोई ऐसे बंगले में रह रहा है तो 2 महीने में उसे खाली करना होगा। जस्टिस अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली तीन मेंबर्स की बेंच ने कहा कि पूर्व सीएम जिंदगीभर सरकारी बंगले में नहीं रह सकते। कोर्ट ने ये फैसला एक एनजीओ की पिटीशन पर सुनवाई करते हुए दिया। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों को लेकर सुनाया फैसला…
– जस्टिस अनिल आर दवे की अगुवाई वाली 3 जजों की बेंच ने ये फैसला सुनाया। बेंच में जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस नागेश्वर राव भी थे।
– सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का असर यूपी के 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों पर पड़ेगा।
– जिन 6 पूर्व सीएम को सरकारी बंगला मिला हुआ है, उनमें नारायण दत्त तिवारी, कल्याण सिंह, मायावती, मुलायम सिंह यादव, राजनाथ सिंह और रामनरेश यादव शामिल हैं।
– कोर्ट के ऑर्डर के बाद इस सभी को 2 महीने में सरकारी बंगला खाली करना होगा।
– इन पूर्व सीएम को लखनऊ के पॉश इलाके माने जाने वाले मॉल रोड और विक्रमादित्य मार्ग पर बंगले अलॉट हुए थे।
एनजीओ ‘लोक प्रहरी’ ने लगाई थी पिटीशन
– यूपी के एक एनजीओ ‘लोक प्रहरी’ ने मामले में पिटीशन दायर की थी।
– पिटीशन में पूर्व मुख्यमंत्रियों और अन्य ‘नॉन एलिजिबल’ ऑर्गनाइजेशंस को सरकारी बंगले के अलॉटमेंट पर सवाल खड़े किए थे।
– लोक प्रहरी ने आरोप लगाया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऑर्डर के बावजूद यूपी सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले देने के लिए एक्स-चीफ मिनिस्टर्स रेसिडेंस अलॉटमेंट रूल्स, 1997 बनाया।
– एनजीओ ने 1997 में बने इस नियम को इल्लीगल और अनकॉन्स्टिट्यूशनल बताया था।
– पिटीशन में कहा गया था कि सरकारी बंगलों पर अनऑथराइज्ड पर्सन्स का कब्जा है। लिहाजा ये यूपी पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट के खिलाफ है।
– पिटीशनर ने ये भी कहा था कि चीफ मिनिस्टर्स के पोस्ट से हटने के बाद अपने सरकारी बंगले को बनाए रखना प्रोविजन ऑफ यूपी मिनिस्टर्स (सैलरी/अलाउंस-अन्य फैसिलिटीज) एक्ट के खिलाफ है।

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