पहली बार बोले सिद्धू- पंजाब से दूर नहीं रह सकता था इसलिए दिया राज्यसभा से इस्तीफा

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नई दिल्ली. राज्यसभा की मेंबरशिप से इस्तीफा देने के बाद चुप्पी साधने वाले नवजोत सिंह सिद्धू आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा कि मुझे पंजाब छोड़ने को कहा गया। मैं उसे कैसे छोड़ सकता हूं? बता दें 18 जुलाई को सिद्धू ने राज्यसभा और उनकी पत्नी ने पंजाब विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। कहां जाएंगे ये नहीं बताया…
– प्रेस कॉन्फ्रेस में सिद्धू ने कहा, ”राज्यसभा से इस्तीफा मैंने इसलिए दिया क्योंकि मुझे ये कहा गया था, कि पंजाब कि तरफ मुंह नहीं करोगे। और पंजाब से तुम दूर रहोगे।”
– ”धर्मों में सबसे बड़ा धर्म राष्ट्र धर्म होता है। तो फिर कैसे सिद्धू अपना वतन छोड़ दे?”
– ”ये नफे नुकसान की बात नहीं है। ये पहली बार हुआ हो तो भी नाकाबिले बरदास्त है। ये तो तीसरी चौथी बार हो रहा है। जब मेरे साथ नाइंसाफी हुई।”
– ”जब पहली बार मैं अमृतसर से इलेक्शन लड़ा।”
– ”मैं पाकिस्तान में कमेंट्री कर रहा था। मुझे कहा गया आप इलेक्शन लड़ो। 17 दिन बचे थे। मैंने कहा कि इतने कम दिन में कैसे चुनाव लड़ सकता हूं। 5-6 नेताओं के फोन मेरे पास आए।”
– ”14 दिन में इलेक्शन लड़ा। 6 बार का कांग्रेस का एमपी था। 9 के नौ 14 दिन में अमृतसर के लोगों ने सवा लाख लोगों ने जिताया।”
– जब आंधियां चलती थी तब तो सिद्धू जाए।
– जब केस पड़ा। केस पड़ते ही एक बड़े नेता ने कहा सरेंडर कर दो तो एक पर्सेंट चांस है कि दोबारा एमपी बन जाओ।”
-”अमृतसर को वचन दिया जबतक आपका एमपी रहूंगा पटियाला नहीं जाऊंगा। घर वाली का मुंह नहीं देखा। बच्चों का मुंह नहीं देखा।”
– अगले दिन बेल हुई। मॉरल ग्राउंड के ऊपर मैं दूसरी बार इलेक्शन लड़ा, फिर जीता।
– तीसरा इलेक्शन नॉर्थ इंडिया की 50 सीटों पर बीजेपी का अकेला सिद्धू सांसद था।
– फिर वाइफ का इलेक्शन आया। हारी हुई सीट जीतकर दे दी।
– ”जब मोदी साहब की लहर आई तो विरोधी के साथ सिद्धू भी साफ हो गया। मुझे कुरुक्षेत्र और वेस्ट दिल्ली से टिकट देने की बात कही गई। मैंने मना कर दिया।”
– ”मुझे कहा गया पंजाब छोड़कर चला जाए। मेरा कुसूर क्या है।”
– ”अगर मुझे 100 बार अपने परिजन, अपने परिवार, अपनी पार्टी और पजांब में से चुनने को कहा गया तो मैं सौ बार पंजाब को चुनुंगा।”
सेलेब्रिटी स्टेटस से केवल एक बार जीत सकते हैं
– सिद्धू ने कहा, ”सेलेब्रिटी स्टेटस के कारण केवल एक बार चुनाव जीता जा सकता है। चार बार नहीं।”
– ”मैं तीन बार खुद जीता और चौथी बार पत्नी को हारी हुई सीट पर जिताया।”
सिद्धू के आप में जाने को लेकर भी नहीं है स्थिति साफ
– प्रेस कॉन्फ्रेस में जिन दो सवालों पर सबकी नजर थी उसपर सिद्धू ने कोई जवाब नहीं दिया।
– सिद्धू से जब AAP में जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा जहां पंजाब का हित होगा सिद्धू वहां होगा।
– उन्होंने बीजेपी छोड़ने के बारे में भी कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
– कहा जा रहा है कि सिद्धू कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों कॉन्टैक्ट में हैं।
5 कारण: सिद्धू की शर्त थी- मंत्री बनाओ, वरना BJP छोड़ दूंगा
1. खुद जाना चाहते थे
बीजेपी सूत्रों ने dainikbhaskar.com को बताया कि नवजोत ने मार्च में ही पार्टी छोड़ने की इच्छा के बारे में बता दिया था। पार्टी को डर था कि सिद्धू के जाने से अगले साल पंजाब में होने वाले चुनाव में BJP की लड़ाई कमजोर हो सकती है। ऐसे में, जल्दबाजी में उन्हें राज्यसभा के रास्ते संसद में भेजने का फैसला पार्टी ने लिया। साथ ही, अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाने का भी प्रस्ताव दिया। पार्टी को भरोसा था कि इससे नवजोत की नाराजगी दूर हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
2. मंत्री बनाने की रखी थी शर्त
सिद्धू ने बीजेपी नहीं छोड़ने के लिए खुद को केंद्र में मंत्री बनाए जाने की शर्त रख दी, जिसे उस समय मान लिया गया था। जुलाई में कैबिनेट विस्तार के दौरान मोदी ने सिद्धू को कैबिनेट में जगह देने से मना कर दिया था। इसे लेकर उन्होंने BJP के एक टॉप नेता को फ़ोन कर नाराजगी जताई।
3. CM कैंडिडेट बनने की थी आखिरी शर्त
सिद्धू ने बीजेपी में रुकने के लिए आखिरी शर्त के तौर पर पंजाब में BJP को अकाली दल से अलग करने और खुद को सीएम कैंडिडेट बनाने का प्रस्ताव दिया। इसे मानने से भी टॉप लीडरशिप ने मना कर दिया। इसके बाद सिद्धू ने राज्यसभा से इस्तीफा देने का मन बना लिया।
4. शाह की टीम में चाहते थे जगह
नितिन गड़करी BJP प्रेसिडेंट थे, तब सिद्धू पार्टी के राष्ट्रीय सचिव थे। बाद में जब अमित शाह को प्रेसिडेंट बनाया गया तो शाह ने उन्हें टीम में कोई जगह नहीं दी, बल्कि चंडीगढ़ से सिद्धू के जूनियर माने जाने वाले नेता चुग को राष्ट्रीय सचिव बना दिया। नवजोत ने इसे लेकर पार्टी के सामने नाराजगी भी जताई थी।
5. अमृतसर से टिकट कटने के बाद नाराज थे
2014 लोकसभा चुनाव के पार्टी ने अमृतसर सीट से सिद्धू का टिकट काट दिया। उनकी जगह अरुण जेटली को पार्टी कैंडिडेट बनाया गया। सिद्धू 10 साल से इस सीट से सांसद थे। पार्टी का यह दांव उलटा पड़ा। जेटली चुनाव हार गए। तब से ही सिद्धू पार्टी से नाराज बताए जा रहे थे।

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