नरसिंह के #Rio में खेलने पर फिर सस्पेंस: NADA की क्लीन चिट पर WADA की रोक, मैच के 24 घंटे पहले आएगा फैसला

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रियो डि जिनेरियो. रियो ओलंपिक में भारत के लिए मेडल की उम्मीद माने जा रहे रेसलर नरसिंह यादव के रिंग में उतरने पर ही सस्पेंस हो गया है। दरअसल, भारत में डोपिंग विवाद के बाद नाडा (नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी) ने नरसिंह को क्लीन चिट दी थी लेकिन वाडा (वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी) ने इस फैसले पर रोक लगा दी है। 18 अगस्त को इस मामले पर फिर सुनवाई होगी। तभी ये फैसला होगा कि नरसिंह 19 तारीख को मुकाबले में उतरते हैं या नहीं। भारत के लिए मुश्किल…
– वाडा ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) में 74kg फ्रीस्टाइल रेसलर के खिलाफ अपील की है। अपील 13 अगस्त को फाइल की गई है। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) और नरसिंह के वकील वी. सिंघानिया को इसकी जानकारी मंगलवार शाम को मिल पाई। वाडा इस केस की सुनवाई शुरू भी कर चुका है।
– नरसिंह 25 जून और 5 जुलाई को हुए डोप टेस्ट में फेल हो गए थे। 24 जुलाई को मामले का खुलासा होने के बाद ये विवाद बढ़ा।
– नरसिंह के निजी रसोइए चंदन और साई सेंटर, सोनीपत के दो मेसकर्मियों विनाेद और राजेश ने नाडा में बयान दिए थे कि खाने में मिलावट हुई थी। एक बार सब्जी से झाग निकलने पर फेंकना पड़ा था।
– कुश्ती फेडरेशन ने रिपोर्ट ने अपनी रिपोर्ट में नाडा को बताया था कि कैसे नरसिंह को ओलिंपिक में जाने से रोकने की कोशिश हुई। पीएमओ, खेल मंत्रालय भी नरसिंह के साथ खड़े हुए।
इन वजहों से नाडा से बरी हुए थे नरसिंह
1. नरसिंह की कोई गलती नहीं और ही उन्होंने कोई लापरवाही बरती है। वे कॉम्पीटिटर की साजिश के शिकार हुए।
2. प्रैक्टिस के दौरान खाने या पानी पर हर समय निगाह रखना मुमकिन नहीं है। 2 जून से पहले का नरसिंह का कोई भी सैंपल पॉजिटिव नहीं पाया गया।
4. जिस प्रतिबंधित मेथाॅयडिएनोन के इस्तेमाल का आरोप लगा, वह वजन बढ़ाने वाली थी। नरसिंह का वजन 81 किलोग्राम था और उन्हें लड़ना था 74 किलोग्राम वजन वर्ग में। ऐसी स्थिति में कोई खुद से ओलिंपक से ठीक पहले वजन बढ़ाने वाले स्टेरॉयड क्यों लेगा?
5. नरसिंह के पार्टनर संदीप तुलसी यादव का भी डोप में पकड़ा जाना, जबकि उन्हें हाल-फिलहाल में किसी टूर्नामेंट खेलना ही नहीं है।
रसोइये ने क्या खुलासा किया था?
– नरसिंह के रसोइये चंदन ने भास्कर को बताया था, ”5 जून को मैं सब्जी तैयार कर रहा था। इस बीच मैं टमाटर लेने स्टोर में गया। लौटा तो देखा कि एक लड़का सब्जी में कुछ डाल रहा था। मैंने मेस वालों से पूछा कि वह कौन था तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।”
– ”खाना देखा तो उसमें झाग बन रहा था। मैंने नरसिंह को जानकारी दी तो उसे फेंक दिया गया। वह लड़का जूनियर कैम्प का है। सामने आए तो पहचान लूंगा।” (यहां पढ़ें- ओलिंपिक से पहले डोप टेस्ट में फेल रेसलर नरसिंह का रसोइया बोला- खाने में मिलावट करने वाले को पहचान लूंगा)
क्या है विवाद की जड़?
– 2012 ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले योगेश्वर दत्त 60 Kg वेट कैटेगरी, सिल्वर जीतने वाले सुशील 66 Kg वेट कैटेगरी और नरसिंह 74 Kg वेट कैटेगरी में खेले थे।
– दिसंबर 2013 में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एसोसिएटेड रेसलिंग स्टाइल्स (FILA) ने नियम बदले।
– इसमें FILA ने रियो ओलिंपिक के लिए नई वेट कैटेगरी का एलान किया।
– इसके बाद योगेश्वर 65 Kg वेट कैटेगरी में खेलने लगे। सुशील 74 Kg वेट कैटेगरी में आ गए, जिसमें नरसिंह सालों से खेलते आ रहे थे।
– नियम के मुताबिक एक वेट कैटेगरी से एक देश से एक ही रेसलर ओलिंपिक में जा सकता है। यहीं से विवाद की नींव पड़ी।

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