राजन के विरोधी स्वामी को मोदी की नसीहत-पब्लिसिटी के शौक से नहीं होगा भला

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नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी ने रघुराम राजन पर सवाल उठाने वाले सुब्रमण्यम स्वामी को सोमवार को नसीहत दी। कहा- “ये जो पब्लिसिटी का शौक है उससे कभी भी देश का भला नहीं होने वाला। कोई अपने आप को व्यवस्था से बड़ा माने, यह गलत है। राजन किसी से कम देशभक्त नहीं हैं।” एक इंटरव्यू में एनएसजी मेंबरशिप को लेकर चीन के विरोध पर भी पीएम पहली बार बोले। कहा- “कुछ विषय में हमारे सैद्धांतिक मतभेद हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि हम आंख से आंख मिलाकर भारत के हितों की बात डंके की चोट पर कहते हैं। मैं इसमें जरा भी कोताही नहीं बरतता हूं।” पढ़ें, 7 अहम मुद्दों पर मोदी ने क्या कहा…
1. रघुराम राजन
– मोदी बोले- ”जब मेरी सरकार बनी 2014 मई में उस वक्त के अखबार-टीवी डिबेट निकाल लीजिए। डिबेट ये होती थी क्या नई सरकार राजन को रहने देगी?”
– ”सबका एक मत था कि पुरानी सरकार ने अप्वाइंट किया इसलिए मोदी निकाल देगा। आप ने देखा उन्होंने टेन्योर पूरा किया। वो सारी गलतफहमियां चली गईं।”
– ”आज जो उनके लिए विवाद कर रहे हैं वे उनके साथ अन्याय कर रहे हैं। मैं मानता हूं कि हममें से किसी से भी राजन के देभभक्ति जरा सी भी कम नहीं है।”
– “जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को बहुत समझदारी के साथ कुछ बोलना चाहिए।”
– ”मैं जितना जानता हूं वे किसी भी पद पर हों कहीं भी हों वे भारत की सेवा और देश को प्यार करने वाला इंसान है। मेरा अनुभव उनके साथ अच्छा रहा है। उनके काम की सराहना करता हूं। उनके भविष्य के लिए हमेशा शुभकामनाएं रहेंगी।”
2. चीन का विरोध
पीएम से सवाल किया गया कि एनएसजी मेंबरशिप, मसूद अजहर पर बैन को लेकर चीन ने अड़चनें पैदा की, आपने 13 बार चीन सरकार से बात की, फिर ऐसा क्यों?
– मोदी बोले- “चीन के साथ बातचीत होती है, होती रहनी चाहिए। विदेश नीति में यह जरूरी नहीं है कि समान विचार के होंगे तो ही बात करेंगे।”
– “चीन-भारत के साथ कई समस्याएं हैं। ढेर पड़ा हुआ है। रास्ता निकालने की कोशिश चल रहा है। चीन भी हमारे साथ को-ऑपरेटिव रहता है।”
– “कुछ विषय में हमारे-उनके सैद्धांतिक मुद्दे हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि आंख से आंख मिलाकर भारत के हितों की बात डंके की चोट पर कहते हैं। मैं इसमें जरा भी कोताही नहीं बरतता हूं।”
– “एनएसजी मेंबरशिप के लिए भी हमने पूरा प्रयास किया है।”
– “एनएसजी को लेकर आलोचना इसलिए नहीं हो रही कि हम वहां असफल हो गए। आलोचना इसलिए हो रही है कि हम वहां ज्यादा सफल हो गए।”
3. पाकिस्तान के साथ रिश्ते
– मोदी पाकिस्तान के साथ रिश्ते को लेकर क्या लक्ष्मण रेखा होनी चाहिए, इस पर भी बोले।
– पीएम ने कहा, ”पाकिस्तान को लेकर भारत को हर पल सजग रहना पड़ेगा। मेरा लाहौर जाना, वहां के पीएम को यहां बुलाना इन कदमों की विश्व में एक स्वर से सराहना हो रही है।” – “आज पाकिस्तान को जवाब देने में मुश्किल हो रही है।”
– “भारत अपने पड़ोसियों से दोस्ती चाहता है। भारत और पाकिस्तान दोनों को गरीबी से लड़ना है।”
– “चुनाव के पहले भी मैं ये बोल रहा था। टेबल पर जिन्हें काम करना है, वो टेबल पर करेंगे, जिसे बॉर्डर पर करना है, वो वहां करेंगे।”
4. विपक्ष का अड़ंगा
– मोदी से जब यह सवाल किया गया कि सरकार विपक्ष के ज्यादा निशाने पर क्यों है, तो उन्होंने कहा- ”मैं इसे अलग तरीके से देखता हूं। मैं मानता हूं कि ज्यादा ही परेशानियां हो रही हैं।”
– ”लेकिन संसद में चर्चा होने से, हो सकता है निर्णय विरोध में हो, चर्चा तो हो। दुख की बात ये है कि चर्चा से कोई भाग जाए, ये लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। काम हो न हो, वो कल हो जाएगा।”
– ”संसद चर्चा के लिए है। अपना तर्क देने के लिए। अपने विरोधों का तर्क देने के लिए। इसको बचाने की जिम्मेदारी हर लोकतंत्र प्रेमी की है। जहां तक सरकार का सवाल है, हर मुद्दे पर हमने लोगों से बात करने की कोशिश की है। सरकार के जो प्रमुख लोग हैं, वो लगे रहते हैं। गति बढ़ी भी है। मैंने खुद भी विपक्ष के लोगों से मिलकर बात की है। कई मसले हल भी हुए।
– “राज्यसभा में 12 बिल, लोकसभा में 10 बिल पास हुए।”
-” लोग विपक्ष-विपक्ष करते रहते हैं। सदन में कई दल एनडीए में नहीं है लेकिन अहम मुद्दों पर सरकार के फैसले के साथ रहते हैं। इस तरह से विपक्ष को बदनाम करना सही नहीं है।”
– ”लेकिन एक दल विपक्ष में है, सब जानते हैं। जिसके साथ समस्या है।”
– ”60 साल सत्ता में रहकर उनका ये करना अच्छा नहीं लगता। जो 60 साल सरकार चलाकर विपक्ष में हैं, सरकारी नीतियां-रीतियां जिन्हें मालुम हैं। उनका ऐसा करना अच्छा नहीं लगता।”
-” मान लीजिए, हम आज सत्ता में हैं, 2040 में विपक्ष में चले गए तो हम उस तरह सदन में बिहेव नहीं कर सकते।”
5. विलफुल डिफॉल्टर
– जब माेदी से पूछा गया कि जो लोग देश से पैसा लेकर विदेशों में रहते हैं (विजय माल्या जैसे विलफुल डिफॉल्टर) और भारत नहीं आते, उन पर सरकार क्या करेगी?”
– मोदी बोले ” देश की जनता के मन में ये सवाल ही नहीं है। देश की जनता को भरोसा है कि ये करेगा तो मोदी करेगा। कर के रहेगा।”
-” मैं इनको कानून क्या होता है, बताऊंगा।”
6. करप्शन
– मोदी बोले, “बहुत सी चीजें होती हैं जो सामने दिखती नहीं हैं।”
– “जो लोग काम कर रहे हैं, उन्हें पता है कि कितना गंध पड़ा हुआ है। आप अगस्ता वेस्टलैंड वाला मामला ही ले लीजिए।”
– “मैं इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि करने वाले लोग अनुभवी लोग हैं।”
– “इनकी बड़ी प्रैक्टिस है कि काले काम कैसे किए जाते हैं।”
– “किसी ने बड़े रक्षा कवच के बिना ऐसे काम नहीं हुए होंगे।”
7. महंगाई
– दाल की कीमत बढ़ने के सवाल पर मोदी बोले- “पिछली सरकार में जितनी तेजी से महंगाई बढ़ रही थी, उसमें कमी आई है।”
– “देश में 2 साल से सूखा है। ऐसी स्थिति में भारत ने बड़ी संख्या में इम्पोर्ट किया है।”
– “सूखे में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। कुछ राज्यों ने अच्छा परफॉर्म किया है, कुछ अच्छा कर रहे हैं।”
– “जहां तक दाल का सवाल है, उत्पादन कम हुआ है। हम लोगों ने दाल को लेकर कई चीजें शुरू की हैं। स्टॉक को लेकर भी बात की है।”
स्पीच से ह्यूमर गायब हो गया है?
– मोदी से जब यह पूछा गया कि पहले आपकी स्पीच में ह्यूमर बहुत होता था, हंसी-मजाक होता था, अब नहीं दिखता, क्यों?, इस पर पीएम बोले- हां, यह सही है।
– “पहले मैं बहुत हंसी-मजाक करता था, लेकिन अब डर लगता है। आजकल मजाक में कुछ बोलना भी खतरनाक हो गया है। ये सोचकर कि पता नहीं, किस बात को, किस मुहावरे को कहां जोड़ दिया जाएगा।”
– “लेकिन जीवन में हंसी-मजाक होना जरूरी है, जो कि अब गायब हो गया है। संसद से भी हंसी-मजाक गायब हो गया है यह चिंता का विषय है।”

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