केन्या में बोले मोदी- दुनिया में फैले इंडियन्स ही हैं भारत के सच्चे एंबेसडर

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नैरोबी.नरेंद्र मोदी केन्या के नैरोबी में इंडियन कम्युनिटी को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कई लैंग्वेज में लोगों का अभिवादन करने के बाद कहा- “आज जो नजारा मैं यहां देख रहा हूं, ऐसा लग रहा होगा कि कार्यक्रम हिंदुस्तान में ही हो रहा है। सरकार एक विदेश विभाग चलाती है। जो सोचता है कि दुनिया भारत से जुड़े। लेकिन भारत के सच्चे एंबेसडर दुनियाभर में फैले भारतीय ही हैं।” मोदी ने और क्या कहा…
– पीएम मोदी ने कासारानी स्टेडियम में कहा- जाम्बो, नमस्कार, केम छो, सत श्री अकाल, नमस्कारम।
– मेरे प्रिय मित्रों, बहनों-भाइयों, केन्या में मिले सम्मान का शुक्रगुजार हूं
– ये हमारे लिए गर्व का विषय है। ये प्रेम का प्रतीक है।
– पिछले 4 दिन से अफ्रीका की यात्रा कर रहा हूं।
– साउथ अफ्रीका गया, तंजानिया गया और अब आपके बीच में हूं।
– मैं पहले भी आपके लिए यहां आ चुका हूं। आप में से कईयों से मेरी मित्रता रही हूं।
– लेकिन आज जो मैं नजारा देख रहा हूं। जो इसे भारत में देख रहे हैं वो जरूर सोचते होंगे।
– नैरोबी का दृश्य देखकर ऐसा लग रहा होगा कि कार्यक्रम हिंदुस्तान में ही हो रहा है।
– जब हम यहां आते हैं तो हमें लगता है कि ये मिनी हिंदुस्तान है।
– जिन संस्कारों को लेकर आपके पूर्वज यहां आए, कारण जो भी रहा हो, गिले-शिकवे जो भी रहा हो, लेकिन आपने इस जगह को अपना बना लिया।
– आपके कंधे से कंधा मिलाकर यहां के नागरिक डेवलपमेंट में आपके योगदान को स्वीकार करते हैं।
– केन्या के राष्ट्रपति चाहते थे कि इस कैलेंडर वर्ष में ही मेरा यहां आना हो। ये उनका और आपका हक है। और इसीलिए आज मैं यहां हूं।
– जब इंडिया-अफ्रीका संबंधों को मजबूत करने की बात करते हैं तो इसमें दुनिया की चिंता भी होती है।
– जब अपनी धरती के लोगों को पीड़ा होती है तो आप भी जरूर सोचते होंगे। आपको भी पीड़ा होती होगी।
– सरकार एक विदेश विभाग चलाती है। जो सोचता है कि दुनिया भारत से जुड़े। लेकिन भारत के सच्चे एंबेसडर दुनियाभर में फैले भारतीय हैं। दुनिया को जोड़ने की ताकत भारतीयों में ही है।
तंजानिया में क्या किया?
– तंजानिया में नरेंद्र मोदी का प्रेसिडेंट जॉन पोंबे जोसेफ मगुफुली ने पारंपरिक स्वागत किया। मोदी ने यहां तंजानिया का ट्रेडिशनल ढोल भी बजाया।
– मोदी ने कहा- ‘भारत ने जंजीबार में वाटर सप्लाई सिस्टम के लिए 92 मिलियन डॉलर (करीब 617 करोड़ रुपए) का इन्वेस्टमेंट किया है। इसके अलावा 5 अन्य सेक्टर्स में भी एग्रीमेंट किए हैं। मैं चाहता हूं कि प्रेसिडेंट मगुफुली जल्द से जल्द भारत आएं।’
– मोदी ‘सोलर ममाज’ के नाम से फेमस रूरल एरियाज की महिला सोलर इंजीनियर्स से भी मिले। बता दें कि इन महिलाओं को भारत सरकार के एक प्रोग्राम के तहत ही ट्रेनिंग दी जा रही है।
तंजानिया में मोदी ने और क्या कहा?
– ‘भारत ने जंजीबार में वाटर सप्लाई सिस्टम के लिए 92 मिलियन डॉलर (करीब 617 करोड़ रुपए) का इन्वेस्टमेंट किया है।’
– इसके अलावा 5 अन्य सेक्टर्स में भी एग्रीमेंट किए हैं।
– ‘हम तंजानिया के 17 शहरों में वॉटर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।’
– ‘हेल्थ भी दोनों देशों के बीच सहयोग का अहम हिस्सा है।’
– ‘तंजानिया में भारत बड़े पैमाने पर दवाओं और इक्विपमेंट्स की सप्लाई करेगा।’
– ‘मैं और मगुफुली इस बात पर सहमत हैं कि दोनों देश डिफेंस, सिक्युरिटी खासकर समंदर में सहयोग करेंगे।’
– ‘भारत और तंजानिया मिलकर न केवल क्षेत्र में बल्कि ग्लोबली आतंकवाद और क्लामेट चेंज का मुकाबला करेंगे।’
‘सोलर ममाज’ की महिलाओं से की मुलाकात
– तंजानिया में महिला सोलर इंजीनियर्स को भारत सरकार के एक प्रोग्राम के तहत सोलर लालटेन और सौर ऊर्जा से चलने वाले लाइट सिस्टम के रखरखाव, यूज, रिपेयर और उसके मेंटेनेंस के लिए ट्रेंड किया गया है।
– यहां मोदी सोलर एनर्जी के दिग्गजों के एक ग्रुप से मुलाकात की।
क्या हैं सोलर ममा, कैसे दी जा रही ट्रेनिंग?
– तंजानिया में संजीत रॉय महिलाओं को सोलर लालटेन की ट्रेनिंग देते हैं। संजीत को बंकर रॉय भी कहा जाता है।
– संजीत कहते हैं, ‘पुरुषों को सिखाया नहीं जा सकता। अगर किसी आदमी को सिखा भी दिया जाए तो वह किसी और को नहीं सिखा सकता। इसके उलट महिलाएं बेहतर तरीके से सीखती हैं। वे खुद का सीखा दूसरों को सिखा सकती हैं।’
– रॉय ने राजस्थान में बेयरफुट कॉलेज की स्थापना की थी। वे 1972 से कमजोर तबके के डेवलपमेंट के लिए मूवमेंट चला रहे हैं।
– 2005 से बेयरफुट कॉलेज, महिलाओं को सोलर लालटेन असेंबलिंग-यूज-मेंटेनेंस की ट्रेनिंग दे रहा है। इन्हें ही सोलर ममा (मां) कहा जाता है।
– अब तक मिडल ईस्ट-पैसिफिक क्षेत्रों और साउथ अफ्रीका की 700 से ज्यादा महिलाओं को ट्रेंड किया जा चुका है और कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री दी गई है।
– बेयरफुट के सीईओ मेगन फेलोन के मुताबिक, ‘साउथ अफ्रीका में हमें जबरदस्त कामयाबी मिली है। जंजीबार में भी हमारी फैसिलिटी है। साउथ सूडान में भी हम ब्रांच खोलने वाले हैं। तंजानिया, बुर्किना फासो में भी जल्द ही प्लान किया जा रहा है।’
– 2005 से लेकर अब तक बेयरफुट 161 गांवों और 12 हजार घरों को सोलर लालटेन से रोशन कर चुका है। इससे करीब 10 लाख लीटर कैरोसिन के यूज में कमी आई है।

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