कश्मीर में हिंसा के 48 दिन: फोर्सेस की कार्रवाई के सपोर्ट में महबूबा बोलीं- प्रदर्शन में जान गंवाने वाले बच्चे दूध-टॉफी लेने नहीं गए थे

Kashmir
श्रीनगर.कश्मीर दौरे पर पहुंचे होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि सिक्युरिटी फोर्सेस द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल पर विचार करने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है। इस गन के विकल्प के बारे में सोचा जा रहा है। राजनाथ के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सीएम महबूबा मुफ्ती कश्मीर में भड़की हिंसा पर सिक्युरिटी फोर्सेस की कार्रवाई के बारे में सवाल पूछने पर तल्ख हो गईं। उन्होंने कहा, “एनकाउंटर के बाद हुए प्रदर्शनों में सरकार की क्या गलती है? प्रदर्शन में जो बच्चे मारे गए हैं, वे वहां क्या दूध-टॉफी लेने गए थे?” क्या केंद्र से नाराज हैं महबूबा…
– राजनाथ सिंह और जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
– हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले कहा गया कि बुधवार को राजनाथ के कश्मीर पहुंचने पर सीएम महबूबा एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने नहीं गईं। बताया जा रहा है कि महबूबा अरुण जेटली के एक बयान से नाराज चल रही थीं।
– पिछले कई दिनों से घाटी के कई इलाकों में कर्फ्यू जारी है, प्रदर्शन और हिंसा का दौर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हो रहा है। राजनाथ ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर बताया था कि मैं कश्मीर पहुंच रहा हूं।
– उन्होंने संविधान के दायरे में शांति के लिए लोगों से सुझाव मांगा था। बता दें कि एक महीने में राजनाथ का यह दूसरा दौरा है।
क्या बोले राजनाथ?
– “हमारे कुछ नौजवान बहकावे में आकर हाथ में पत्थर उठाते हैं तो उन्हें समझाएं। युवाओं के भविष्य से न खेलें। अगर कश्मीर का फ्यूचर नहीं बनेगा तो भारत का फ्यूचर भी नहीं बनेगा।”
– “ऐसा पहली बार हुआ होगा कि कश्मीर के हालात पर एक महीने में भारत का गृहमंत्री दो बार वहां गया। मैंने सीएम से कहा कि कश्मीर में ऑल पार्टी डेलिगेशन आएगा।”
– “मैंने पैलेट गन पर एक्सपर्ट्स कमेटी बना दी है। पहले माना गया कि पैलेट गन से कम डैमेज होता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका अल्टरनेट होना चाहिए। इसका कम से कम इस्तेमाल हो। इसका विकल्प जल्द सामने होगा।”
– “जब कश्मीर में बाढ़ आई थी तो जवानों ने काफी मदद की थी। इस मामले पर पीएम की पीड़ा सामने आई है। वे लगातार मुझसे इस मसले पर बात करते रहते हैं।”
– “कश्मीर के बहनों-भाइयों से यही कहना चाहता हूं कि राज्य में अमन कायम करने में सहयोग दें। सिक्युरिटी फोर्सेस संयम बरतें।”
– “जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत के मु्द्दे पर हम सबसे बात करने को तैयार हैं। मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स कश्मीर मसले पर एक नोडल अफसर की नियुक्ति करने जा रहा हैं। कश्मीर के लोग उनसे सीधे बात कर सकते हैं।”
क्या बोलीं सीएम महबूबा?
– ताजा हिंसा की तुलना कश्मीर के माछिल एनकाउंटर और शोपियां रेप और मर्डर केस के बाद भड़के प्रदर्शनों से करने के सवाल पर महबूबा भड़क गईं।
– उन्होंने कहा, “उस वक्त कुछ लोगों का एनकाउंटर हुआ था। लड़कियों से रेप के मामले सामने आए थे। वो हालात अलग थे। लेकिन अब यहां एक एनकाउंटर हुआ है, जिसमें कुछ आतंकी मारे गए।”
– “इसके बाद हुए प्रदर्शनों में सरकार की क्या गलती है? आर्मी कैम्प पर हमले में कोई बच्चा शामिल है तो क्या वह वहां टॉफी लेने गया था? एक और कैम्प पर हमले के दौरान क्या बच्चा वहां दूध लेने गया था? इस तरह पथराव और कैम्प पर हमला करने से मसला हल नहीं होगा। 95% लोग अमन चाहते हैं। 5% लोग हमारे बच्चों को ढाल बनाते हैं। उन्हें अंधा बनाना चाहते हैं, मारना चाहते हैं। ये बात आपको समझ नहीं आती।”
क्या है पैलेट गन, कैसे करती है काम?
– कश्मीर में विरोध को रोकने के लिए 2010 से ही पुलिस पैलेट गन का यूज कर रही है। तब पुलिस ने इसे नॉन-लीथल हथियार होने के चलते यूज करना शुरू किया था।
– नॉन-लीथल हथियार उन्हें कहा जाता है, जिसके यूज से मरने के चांसेस कम होते हैं, लेकिन हर साल पुलिस इसका इस्तेमाल बढ़ाती गई।
– इस बंदूक से सैकड़ों छर्रे निकलते हैं, जिनसे शरीर पर कई तरह की चोटें आ सकती हैं। छर्रे को तेजी से बाहर निकालने के लिए हाइड्रोलिक बल का इस्तेमाल किया जाता है।
– पैलेट के छर्रे आंख में घुस जाते हैं और आंख के टिश्यू को धीरे-धीरे खराब करने लगते हैं।
– गन को कमर से नीचे चलाने के लिए कहा गया है। लेकिन प्रदर्शनकारियों के हमले के चलते सिक्युरिटी फोर्सेस को सामने से गन चलाना पड़ रही है।

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