मायावती गालीकांड: बेल पर जेल से 10वें दि‍न बाहर आए दयाशंकर सिंह

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मऊ. मायावती के खि‍लाफ गालीकांड के आरोपी पूर्व बीजेपी नेता दयाशंकर सि‍ंंह जेल से 10वें दि‍न रवि‍वार सुबह बेल पर बाहर आ गए। अपर जि‍ला जज डॉ. अजय कुमार ने शनि‍वार को उनका बेल स्‍वीकार कर लि‍या था। कोर्ट ने 50-50 हजार रुपए के दो जमानत और 50 हजार के व्‍यक्‍ति‍गत मुचलके पर उन्‍हें बेल दि‍या। शनि‍वार शाम 5 बजे तक यह आदेश जेल नहीं पहुंचने के कारण उन्‍हें नहीं छोड़ा जा सका था। इसलि‍ए रवि‍वार सुबह जेल से उनकी रि‍हाई हुई। क्‍या है पूरा मामला…
– 20 जुलाई को शहर कोतवाली इलाके के भाजपा कार्यालय में दयाशंकर सिंह ने मायावती के खि‍लाफ आपत्‍ति‍जनक भाषा का इस्‍तेमाल किया था।
– इस मामले में बसपा के राष्‍ट्रीय सचि‍व मेवालाल गौतम ने लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में रि‍पोर्ट दर्ज कराई थी।
– 29 जुलाई को लखनऊ पुलि‍स ने उन्‍हें बक्‍सर से गि‍रफ्तार कि‍या था।
क्‍या है गालीकांड
दयाशंकर ने मयावती को लेकर क्या कहा था
– ”आज टिकटों की इस तरह से बिक्री कर रही हैं, जैसे एक **** पुरुषों के साथ डील करती है।”
– ”तीन-तीन बार की मुख्यमंत्री किसी को एक करोड़ में टिकट देती हैं, एक घंटे बाद कोई दो करोड़ देता है तो उसे भी दे देती हैं। शाम को कोई तीन करोड़ देता है तो उसकाे टिकट दे देती हैं। एक **** तो कम से कम पैसा पाने के बाद अपना वादा पूरा करती है।”
– ”**** से भी बदतर चरित्र की मायावती जी हो गई हैं। लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली थी। विधानसभा में भी इसका खामियाजा भुगतना होगा।”
बीएसपी ने जमकर किया था विरोध
– बसपाइयों ने 21 जुलाई को लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान बैनरों पर दयाशंकर, उनकी बहन और बेटी के बारे में आपत्तिजनक बातें लिखी थीं।
– इसके जवाब में स्‍वाति सिंह ने बीएसपी पर जमकर निशाना साधा। दयाशंकर की मां और स्‍वाति‍ सि‍ंंह ने इस कांड के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
– इस दौरान मायावती और दयाशंकर की पत्नी के बीच बयानबाजी हुई। मायावती ने गाली के विरोध में गाली देने पर अपने वर्कर्स का बचाव किया।
– उन्होंने कहा कि ऐसा दयाशंकर को अहसास दिलाने के लिए कहा गया।
BSP कार्यकर्ताओं के नारे का गलत मतलब नि‍काला गया
– मायावती ने कहा, ‘BSP कार्यकर्ताओं ने जो नारा लगाया, उसका बीजेपी ने गलत मतलब नि‍काला।’
– ”यह उनकी दूषि‍त मानि‍सकता का परि‍चय है।”
– ”जो कुछ कि‍या जा रहा है वो दयाशंकर सिंंह को बचाने के मकसद से कि‍या जा रहा है।”
– ”बीजेपी यदि‍ दयाशंकर सिंंह की बेटी के बचाव के साथ-साथ एक दलि‍त की बेटी के सम्‍मान के लि‍ए भी धरना प्रदर्शन भी करती तो अच्‍छा होता।”
बचाव में दी ये दलील
– दयाशंकर सि‍ंंह की मां-पत्नी ने जो तहरीर दी है, उसमें संसद में मेरे बयान का उल्‍लेख है।
– ‘संवि‍धान की धारा 105 में सांसदों को संसद में अपनी बात रखने का अधि‍कार है।’
– ‘वहां कही गई कि‍सी बात पर कि‍सी भी कोर्ट में चैलेंज नहीं हो सकता।’
– ‘इसके बावजूद हजरतगंज थाने में उसी चीज को लेकर एफआईआर दर्ज की गई। ये संसद की अवमानना है।’
– ‘बीजेपी और सपा ने जबरन गैरकानूनी काम पुलिस से कराया।’
दयाशंकर सिंंह की मां और स्‍वाति‍ सि‍ंंह की कंप्‍लेन पर बसपा नेताओं पर हुई कार्रवाई
– दयाशंकर सि‍ंह की फैमि‍ली द्वारा बीएसपी नेताओं पर दर्ज कराए गए केस में सीडी देखने के बाद पुलि‍स ने बीएसपी नेताओं पर कार्रवाई की।
– इसमें बीएसपी प्रदेश अध्‍यक्ष राम अचल राजभर, वेस्‍ट यूपी प्रभारी अतर सि‍ंह राव, बुंदेलखंड के प्रभारी नौशाद अली पर पॉक्‍सो एक्‍ट के तेहत केस दर्ज कि‍या गया।
– उनके अलावा 17 अन्‍य को भी चि‍न्‍हि‍त कि‍या गया।
– पॉक्‍सो एक्‍ट के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलि‍स पर इन नेताओं के खि‍लाफ गि‍रफ्तारी का दबाव बढ़ गया है।
ये है पॉक्‍सो एक्‍ट
-2012 में बने द प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फॉर सेक्सुअल अफेंस (पॉक्सो) 18 साल से कम उम्र के नाबालिग के साथ प्राकृतिक या अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने या उनकी पोर्न फिल्म बनाने पर इस कानून का इस्तेमाल किया जाता है।
-इसके अलावा उन्हें भद्दे इशारा करना या अश्‍लीली बातें कहना भी इस कानून के दायरे में आता है।
-इस एक्‍ट के तहत दर्ज मुकदमें की सुनवाई पॉक्‍सो अदालत में होती है।
-इसकी सुनवाई बंद कमरे में होती है और पीड़ित की पहचान छुपाना अनिवार्य होता है ।
-इस मामले में अदालत को घटना की रिपोर्ट दर्ज होने के एक साल में फैसला देना होता है।
-इस कानून के तहत पॉक्‍सो अदालत में गलत मुकदमा करने वाले को जुर्माना या 6 महीने की जेल भी हो सकती है।

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