20वीं सदी का सबसे भयानक सामूहिक कत्लेआम, ऐसे मारे गए थे 5 लाख लोग

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इंटरनेशनल डेस्क। इंडोनेशिया की सरकार अक्टूबर 1965 में यहां हुए कत्लेआम की जांच करेगी। 50 साल पहले हुए इस कत्लेआम में 5 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे। ये 20वीं सदी का सबसे भयानक सामूहिक हत्याकांड है। इसमें खासतौर पर कम्युनिस्ट, चीनी नागरिक और लेफ्टिस्ट्स को निशाना बनाया गया था। पीकेआई की बढ़ती ताकत से घबराए मिलिट्री और रिलीजियस ग्रुप्स…
– दरअसल ये लड़ाई देश की सबसे बड़ी पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडोनिशिया (पीकेआई) और मिलिट्री-रिलीजियस ग्रुप्स के बीच थी।
– उस वक्त प्रेसिडेंट तो सुकार्नो थे, लेकिन सेना का एक सीनियर जनरल सुहार्तो भी सत्ता संभालना चाहता था।
– जब पीकेआई की ताकत बढ़ने लगी तो इसे प्रेसिडेंट सुकार्नो का भी सपोर्ट मिला।
– इससे मुसलमानों और मिलिट्री की चिंता बढ़ने लगी। तनाव यहीं से शुरू हुआ। क्योंकि पीकेआई के पास करीब 3 लाख कैडर और 20 लाख लोगों की मेंबरशिप थी।
– धार्मिक दलों और मिलिट्री के अंदर पीकेआई के लिए नफरत और गहरी होने लगी।
एेसे शुरू हुआ मौत का सिलसिला
– इस बीच 30 सितंबर-1 अक्टूबर 1965 को सेना के एक ग्रुप ने 6 सीनियर जनरल्स की हत्या कर दी।
– इस हत्याकांड में प्रेसिडेंट सुकार्नो के एक कर्नल को आरोपी माना गया।
– इस मौके को जनरल सुहार्तो ने अच्छी तरह भुनाया और इसे तख्तापलट की कोशिश का नाम दिया।
– सुहार्तो ने सेना को इकट्ठा किया और राजधानी को अपने कब्जे में ले लिया।
– सेना ने तख्ता पलट की इस कोशिश का आरोप पीकेआई और उसके समर्थकों पर लगाया।
– 5 अक्टूबर को जब मारे गए जनरल्स का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तब पीकेआई के खिलाफ मिलिट्री प्रोपेगैंडा चलाया गया, जो देश भर में फैल गया।
– इन जनरल्स के फोटोज हर जगह बांटे गए और देश को बताया गया कि कम्युनिस्ट पार्टी के लोगों ने इन्हें टॉर्चर किया और आंखें तक निकाल लीं। इनमें कम्युनिस्ट पार्टी की महिलाएं भी शामिल थीं।
– इसके बाद धार्मिक दलों, धार्मिक गुरुओं और मिलिट्री के मन में दबी हुई नफरत बाहर निकली और देश में कत्लेआम हुआ।
मीडिया ने नहीं दिया साथ
– 9 अक्टूबर को प्रेसिडेंट सुकार्नो ने कैबिनेट की मीटिंग बुलाई। हालांकि, मीडिया ने इस मीटिंग को इग्नोर किया।
– चूंकि, मीडिया आर्मी के कंट्रोल में थी, इसलिए उसने इस पूरे मूवमेंट को इंडोनेशियन नेशनल रेवोल्युशन का नाम दिया।
– मीडिया ने प्रेसिडेंट सुकार्नो की सत्ता उखाड़ फेंकने की बात कही।
– सुकार्नो पर तनाव इतना बढ़ा कि उन्हें सुहार्तो को सत्ता सौंपनी पड़ी।
– सुहार्तो ने 31 सालों तक इंडोनेशिया पर शासन किया।

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