#Rio: 43 KM मैराथन में प्यास से बेहोश हो गईं थीं भारतीय रनर जैशा, मौके पर नहीं थे अफसर, मिनिस्ट्री-एएफआई एक-दूसरे को ठहरा रहे जिम्मेदार

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नई दिल्ली.रियो ओलिंपिक में भारत की मैराथन रनर ओपी. जैशा प्यास और थकान की वजह से ट्रैक पर ही बेहोश होकर गिर गईं थीं। हैरानी की बात ये है कि इस दौरान उनकी मदद के लिए कोई सपोर्ट टीम स्टाफ मौजूद नहीं था। जबकि रूल्स के मुताबिक ऐसा होना चाहिए था। जैशा ने खुद कहा- वहां मैं मर भी सकती थी। बात यहीं खत्म नहीं होती। जैशा को हॉस्पिटल में एडमिट कराने वाले कोच ने जब डॉक्टर्स से एथलीट का हेल्थ अपडेट मांगा तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया। सिलसिलेवार जानिए मामला….
– जैशा वुमन मैराथन में हिस्सा ले रहीं थीं। उन्हें कुल 43 किलोमीटर दौड़ना था। इवेंट सुबह 9 बजे शुरू हुआ।
– जैशा के मुताबिक, “वहां झुलसाने वाली गर्मी थी। इवेंट के दौरान हर देश की तरफ से अपने रनर्स के लिए हर दो किलोमीटर पर स्टॉल्स लगाए गए थे। भारत के स्टॉल्स पर कोई नहीं था। हमें 8 किलोमीटर दौड़ने के बाद ड्रिंकिंग वॉटर इसलिए मिल पाया क्योंकि, वो स्टॉल्स ऑर्गनाइजर्स की तरफ से लगाए गए थे।”
– “टीम स्टाफ की तरफ से एनर्जी ड्रिंक तो छोड़िए पानी तक का अरेंजमेंट नहीं किया गया था। रूल्स के मुताबिक, हम केवल अपने देश के टेक्निकल स्टाफ से ही ड्रिंक ले सकते हैं। लेकिन, हमारे स्टॉल्स तो सूने थे।” जैशा इवेंट में 89th पोजिशन हासिल कर सकीं थीं।
फिनिश लाइन पर बेहोश और कोच पुलिस हिरासत में
– जैशा फिनिश लाइन पर पहुंचते-पहुंचते बेहोश होकर गिर पड़ीं। उन्हें फौरन हॉस्पिटल ले जाया गया। जैशा के साथ उनके रशियन कोच निकोलई सेंसारेव भी थे।
– निकोलई ने वहां डॉक्टर्स से जैशा की सेहत को लेकर सवाल किए। इसी दौरान डॉक्टर्स से उनकी बहस हुई।
– इस टकराव का नतीजा ये हुआ कि सेंसारेव को करीब 12 घंटे पुलिस हिरासत में गुजारने पड़े।
– इस बारे में जैशा ने कहा, “कोच को लगा कि मेरी मौत हो चुकी है। वो डॉक्टरों से भिड़ गए और जबरन मुझे देखने मेरे रूम में घुसे। निकोलई जानते थे कि अगर मुझे कुछ हो गया तो उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा।”
– “जब मैंने ऑफिशियल्स से स्टॉल्स पर किसी के मौजूद न होने के बारे में पूछा तो कोई जवाब नहीं मिला। मेरे कोच पर सवाल उठाए जा रहे हैं लेकिन ये सोचिए कि अगर मैं वहां मर जाती तो क्या होता?”
अब क्या कह रहे हैं जिम्मेदार?
– स्पोर्ट्स मिनिस्टर विजय गोयल ने कहा- पानी या बाकी चीजों का अरेंजमेंट करने की जिम्मेदारी एएफआई (एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) की थी। हालांकि, जब भी इस तरह की घटनाएं होतीं हैं तो हम उन पर एक्शन लेते हैं।
– एएफआई सेक्रेटरी सीके. वॉल्सन भी पल्ला झाड़ते हुए कहते हैं, “ये ऑर्गनाइजर्स की जिम्मेदारी है कि वो एथलीट्स को एनर्जी ड्रिंक्स या पानी अवेलेबल कराएं। हम भी ऐसा कर सकते थे लेकिन कोच या किसी और ने हमसे ये मांग ही नहीं की।”

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