हाईकोर्ट ने यूपी के कैदियों की ‘प्री मेच्योर रिहाई’ की सरकारी नीति की तलब

High Court
इलाहाबाद.उत्तर प्रदेश के जेलों में सजा काट रहे बूढ़े कैदियों की समय से पहले रिहाई की नीति कोर्ट में प्रस्तुत न कर सकने का मामला हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। दो जजों की पीठ ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिया है कि वह अगले बुधवार 13 जुलाई को हर हालत में कोर्ट को बताएं कि प्रदेश के जेलों में बंद बूढ़े कैदियों की समय से पहले रिहाई की कोई सरकारी नीति है या नहीं। नैनी जेल में सजायाफ्ता कैदी की मांगी जानकारी..
कोर्ट ने इसी के साथ केंद्रीय जेल नैनी में हत्या के मामले में सजा काट रहे बांदा के एक बू़ढ़े कैदी रामेश्वर की रिहाई को लेकर जेलों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट पर प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिया है कि वह इसकी रिहाई को लेकर लिए गए निर्णय से अवगत कराएं।
जनहित याचिका पर दिया आदेश
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने लवकुश की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में कहा गया है कि देश के तीन राज्यों में ‘प्री मेच्योर रिहाई’ की सरकारी नीति है। लेकिन, यूपी में अभी तक ऐसी किसी नीति का खुलासा नहीं किया गया है। जनहित याचिका में कहा गया है कि यूपी में कैदियों को रखने की जेलों में व्यवस्था नहीं है।
इसलिए नाराज थी कोर्ट
सजायाफ्ता बूढ़े कैदी जिनका जेल मैनुअल के रिकार्ड के मुताबिक, आचरण ठीक है, उन्हें सरकारी नीति बनाकर रिहा किया जाना चाहिए। यही कारण था कि कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को ‘प्री मेच्योर रिहाई’ के संबंध में सरकारी नीति स्पष्ट करने को कहा था। लेकिन, सरकारी नीति न बता सकने के कारण कोर्ट नाराज थी।

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