कुरान नहीं पढ़ पाई थी तारिषि, इसलिए मौत से पहले आतंकियों ने किया था टॉर्चर

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फिरोजाबाद.ढाका के हॉली आर्टीसियन बेकरी में हुए ISIS अटैक में मरने वाली 19 साल की तारिषि जैन फिरोजाबाद से ताल्लुक रखती थी। तारिषि के साथ उसकी दोस्त अबिंता कौर और फराज हुसैन की भी मौत हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तारिषि और उसके दोस्तों से आतंकियों ने कुरान पढ़ने के लिए कहा था। जब वे ऐसा नहीं कर पाई तो उसे टॉर्चर दिया गया। उसके शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। फैमिली ने दर्द बयां करते हुए बताया कि वो रविवार को अपने घर फिरोजाबाद लौटने वाली थी। जानिए क्यों गई थी ढाका…
– बचपन से ही पढ़ने में होशियार रहीं तारिषि ने कैलिफोर्निया के बेर्केले कॉलेज में एडमिशन लिया था।
– तारिषि ने वहां से एमबीए इकोनॉमिक्स की डिग्री ली है।

– रिपोर्ट के मुताबिक ईस्टर्न बैंक लिमिटेड ने तारिषि को अपने इंटरनशिप प्रोग्राम 2016 में शामिल किया था।
– तारिषि ढाका में ईस्टर्न बैंक के प्रोजेक्ट ‘ईबीएल – कॉमर्स ग्रोथ अपॉर्चुनिटी इन बांग्लादेश’ में पार्टिसिपेट कर रही थीं।
– तारिषि की फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक वो इंटरनेशनल स्टूडेंट्स एसोसिएशन, बेर्केले की मेंबर थीं।
– उन्होंने एफबी पर दोस्तों व फैमिली के साथ स्विट्जरलैंड और तुर्की में बिताए वेकेशन की फोटो शेयर की थीं।
गुड़गांव में होगा दाह संस्कार
– सोमवार की दोपहर करीब 1.30 बजे उसका शव दिल्‍ली पहुंचेगा।
– वहां गुड़गांव में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
– तारिषि के चाचा राकेश मोहन जैन के मुताबिक ढाका जाने के लिए 6 लोगों का वीजा विदेश मंत्रालय ने बनवा दिया था, लेकिन शव यहीं लाने की तैयारी चल रही है।
ढाका में ही हैं तारिषि के पेरेंट्स
– तारिषि के पिता संजीव जैन, मां तुलिका जैन और भाई संचित जैन ढाका में ही हैं।
– वे सभी शव के साथ सोमवार की शाम तक फिरोजाबाद पहुंचेंगे।
– राकेश मोहन ने बताया, “मेरा पूरा परिवार सदमे में है। भइया ठीक से फोन पर बात भी नहीं कर पा रहे।”

कौन थी तारिषि

– बांग्‍लादेश में आतंकी हमले में मारी गई तारिषि जैन का परिवार मूलरूप से फिरोजाबाद के सुहानगर का रहने वाला है।
– उसके पिता संजीव जैन वर्ष 1990 में बिजनेस के सिलसिले में हांगकांग शिफ्ट हो गए थे।
– वहीं पर वर्ष 1997 में तारिषि का जन्‍म हुआ।
– शुरुआती पढ़ाई हांगकांग में ही हुई।
– गारमेंट कारोबार के सिलसिले में उनका परिवार 2006-07 में ढाका शिफ्ट हुआ था।
– तारिषि एमबीए करने के लिए कैलिफोर्निया गई थी।
– वह हाल ही में वहां से लौटकर 3 महीने की इंटर्नशिप करने ढाका आई थी।
सहेलियों संग पार्टी करने गई थी, फिर नहीं लौटी तारिषि
– चाचा राकेश मोहन ने बताया, “तारिषि सहेलियों के साथ पार्टी करने रेस्टोरेंट गई थी। कई दिनों बाद जब सहेलियां मिलीं तो उन्होंने जश्न मनाने के लिए उस रेस्टोरेंट को चुना था।”
– “क्या पता था कि कुछ देर में होने वाली घटना उन्हें जिंदगी भर का दर्द दे जाएगी। काश! मेरी भतीजी इंटर्नशिप करने ढाका ही नहीं आती,” राकेश मोहन जैन ने बताया।
रविवार को फिरोजाबाद आने का था प्‍लान, पर आ गई मौत
– तारिषि अपने पेरेंट्स और भाई के साथ रविवार को फिरोजाबाद आने वाली थी।
– अब बेटी का शव लेकर उसके पिता, मां और भाई सोमवार को आएंगे।
– चाचा ने बताया, “गुरुवार को भाई संजीव जैन से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि तारिषि अब एमबीए करके आ गई है और 3 महीने साथ में रहेगी।”
– “भइया इंडिया घूमने आ रहे थे। इसी वेकेशन के दौरान उनका संडे को फिरोजाबाद आने का प्‍लान था। उन्होंने एक ही दिन रुकने की बात कही थी, लेकिन अब सिर्फ मातम है,” राकेश मोहन ने बताया।
सोसाइटी बदलना चाहती थी तारिषि, लड़ रही थी गरीबी से जंग
– तारिषि यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ‘EthiCAL’ से जुड़ी हुई थीं।
– यह ऑर्गेनाइजेशन वंचित उद्यमियों की मदद करता है।
– गत 5 अप्रैल को तारिषि ने अपने फेसबुक पर पोस्ट किया था, “हम अपनी नई क्लोथिंग लाइन की लॉन्चिंग को लेकर उत्साहित हैं। प्लीज हमारे मिशन में हमारा सपोर्ट कीजिए। हम उभरते एंटरप्रेन्योर्स की मदद करते हैं और वर्ल्ड से गरीबी को दूर भगाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।”
– ‘EthiCAL’ क्लब टी-शर्ट्स बेचकर स्टार्ट-अप्स को फाइनेंस करता है।
– इस क्लब से जुड़ने के बाद तारिषि को लगता था कि वो इस सोसाइटी में एक बड़ा बदलाव ला सकती हैं।

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