मोदी जी, मैं बीपीसीएल -प्लीज हेल्प

Allahabad City, Naini

नैनी (इलाहाबाद) : औद्योगिक क्षेत्र में मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त भारत पम्पस एंड कम्प्रेसर्स लिमिटेड (बीपीसीएल) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की दरकार है। आर्थिक तंगी से जूझ रही इस कंपनी के पास इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) से मिला 140 करोड़ रुपये का वर्कआर्डर पूरा नहीं हो सका है। वजह है कार्यशील पूंजी का अभाव। सिर्फ 25 करोड़ रुपये चाहिए, पर अच्छे दिनों का वादा करने वाली सरकार ऐसा नहीं कर सकी है। कहा जा रहा है कि प्रबंधन ने भारी उद्योग मंत्रालय में आवाज उठाई है, लेकिन यह दिल्ली में नहीं गूंजी।

भारत पम्पस एंड कम्प्रेसर्स लिमिटेड यानि बीपीसीएल की स्थापना आयल संबंधित सेक्टर के उपकरणों को बनाने के लिए सन् 1970 में की गई थी। इसका उद्घाटन बतौर विदेश मंत्री राजा दिनेश सिंह ने किया था। तेल एवं उर्वरक क्षेत्र के संस्थानों के लिए उपकरण की आपूर्ति करने के साथ-साथ बीपीसीएल उसकी मरम्मत भी करती है। संस्थान में पम्पस एंड कम्प्रेसर्स बनते हैं। वर्ष 2014 में इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड ने 140 करोड़ रुपये का वर्कआर्डर दिया था। बीपीसीएल को 600 हार्स पावर की क्षमता वाली 4एचएच माडल कम्प्रेसर्स 2015 में बनाकर देने थे। जनरल मैनेजर मोहन कुमार बताते हैं कि उपकरण बनाने में जो खर्च पा‌र्ट्स की खरीद में आता है, उसका सिर्फ 60 फीसद ही वर्कआर्डर देने वाली कंपनी भुगतान करती है। शेष 40 फीसद रकम संस्थान को लगानी पड़ती है। अगर 25 करोड़ की सहायता राशि (कार्यशील पूंजी) भारी उद्योग मंत्रालय से मिल जाय तो वर्क आर्डर को पूरा किया जा सकता है। इस तरह महज 25 करोड़ रुपये की दरकार है। कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष ओपी तिवारी व महामंत्री आएलडी दुबे का कहना है कि कंपनी में बंद हो गई तो सरकार को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का नुकसान सहना पड़ेगा। बीपीसीएल कर्मी प्रधानमंत्री से पिछले दो वर्षो से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की गुहार लगा रहे है, लेकिन सहायता राशि उपलब्ध नहीं कराए जाने से कंपनी के भविष्य पर खतरे का बादल मंडराने लगे हैं।

नामचीन कंपनियों से वर्क आर्डर

बीपीसीएल के मुख्य ग्राहक देश की प्रतिष्ठित ऑयल कंपनी ओएनजीसी, आइओसीएल, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. व बीएचइएल है। उक्त कंपनियां डायरेक्ट संस्थान को वर्क आर्डर दिया करती हैं। इन दिनों कार्यशील पूंजी ही नहीं है, इसलिए एक तरह से कोई काम नहीं हो रहा।

इनसेट -डबल काम

मुनाफे से घाटे का दौर और अस्थिरता

नैनी, इलाहाबाद : एक दौर था जब कंपनी मुनाफे में थी। दो दशक पहले कंपनी में अधिकारी व कर्मचारियों की संख्या करीब दो हजार थी। एक दशक में रिटायर ज्यादा हुए, भर्ती किसी की नहीं हुई। फिलहाल कंपनी में 113 अधिकारी व 367 कर्मचारी कार्यरत हैं। वित्तीय वर्ष 2008, 2009 व 2010 में कंपनी मुनाफे में थी। इसे भारी उद्योग मंत्रालय ने मिनीरत्न का दर्जा दिया था। अधिक उत्पादन के लिए नई मशीन स्थापित हुईं। वर्क आर्डर मिले तो कार्यशील पूंजी की समस्या उत्पन्न हो गई और घाटा बढ़ने लगा। अस्थिरता भी रही है यहां। पिछले तीन साल में चार प्रबंध निदेशकों की तैनाती हुई। एक जून से 31 अगस्त 13 तक 3 माह के लिए अखिल जोशी प्रबंध निदेशक थे फिर एक सिंतबर 13 से 31 अगस्त 14 तक पीके वर्मा। एक सितंबर 14 से 24 जनवरी 15 तक पांच माह के लिए के राजेन्द्रन ने यह जिम्मेदारी निभाई। पांच मार्च 15 से सुधांशु पाठक एमडी हैं। वह महीने में सिर्फ दो बार आते हैं और अधिकतर समय दिल्ली स्थित कारपोरेट आफिस में बैठते हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि बिगड़ती हालत से कंपनी को उबारने के लिए उनके पास कोई योजना नहीं है।

Source : Dainik jagran

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