यहां बाढ़ आने पर लोग मनाते हैं खुशियां, PHOTOS में देखें यूं करते हैं सेलिब्रेट

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इलाहाबाद.संगम नगरी (इलाहाबाद) में गंगा और यमुना में बाढ़ लाने के लिए बाढ़ उत्सव मनाया जाता है। गंगा नदी का पानी अपने उफान पर आकर जैसे ही संगम किनारे स्‍थित लेटे हुनमान मंदिर के गर्भ गृह में पहुंचता है, लोगों में खुशी का ठिकाना नहीं रहता। भले ही बाढ़ की पानी से लोगों की परेशानी होती हो, लेकिन वो दुखी होने के बजाय खुशियां मनाते हैं। लोग जमकर बाढ़ की पानी में नहाते हैं। आगे पढ़िए क्‍या है मान्‍यता…
-यहां बाढ़ को एक उत्सव के रूप में मनाने के पीछे एक अनोखी धार्मिक मान्‍यता है।
-गंगा नदी में बाढ़ का इंतजार यहां के साधु-संत ही नहीं, बल्‍कि स्‍थानीय निवासी सहित सैलानी भी करते हैं।
-यहां के लोगों के अनुसार, पौराणिक मान्‍यता है कि गंगा को हनुमान जी की मां के रूप में कल्पना की गई है।
-इसलिए मां गंगा अपने संकल्पित पुत्र हनुमान को हर साल स्नान कराने खुद उनके पास आती हैं।
-यहां त्रिवेणी के तट पर लेटे हुए हनुमान की मंदिर है।
-ऐसे में जब तक गंगा का पानी हनुमान की मूर्ति तक नहीं पहुंचता है तो अशुभ माना जाता है।
-जब गंगा के बाढ़ का पानी लेटे हुए हनुमान की मूर्ति तक पहुंचता है तो कहा जाता है कि मां गंगा अपने पुत्र को स्‍नान कराने आ गईं।
बाढ़ से पूरी तरह जलमग्‍न हो गया है मंदिर, लेकिन लोग मना रहे खुशियां
-इलाहाबाद में मूसलाधार बारिश की वजह से लोगों के घरों में पानी भर गया है।
-घाट के किनारे पंडों की कुटिया पूरी तरह पानी में समां गई हैं।
-बाढ़ की वजह से लोग घाट पर डेरा डाए हुए हैं।
-लोगों का कहना है कि जब तक बाढ़ का पानी नहीं घटेगा, सभी लोग यहीं पर ही गुजर-बसर करेंगे।
-लेकिन खुशी की बात है कि बाढ़ का पानी लेटे हुए हनुमान की गर्भ गृह तक पहुंच गया है।
-ऐसे में लोग पानी में कूद-कूद कर स्‍नान कर रहे हैं और खुशियांं मना रहे हैं।
-पिछले कई सालों से मां-पुत्र के मिलन का ये संयोग नहीं बन पाया था।
-लेकिन इस साल पूरा मंदिर जलमग्‍न हो चुका है, जो खुशी की बात है।
-बाढ़ का यह महापर्व तब तक चलेगा, जब तक गंगा का यह पानी वापस अपनी जगह नहीं पहुंच जाता।
-इस दौरान हनुमान जी की आरती पास ही स्‍थित राम जानकी मंदिर में होती है।

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