सहकारिता संघ के MD की सैलरी पर रोक, पढ़े हाईकोर्ट की 3 बड़ी खबरें…

High Court
इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सहकारिता संघ के प्रबंध निदेशक अरविन्द सिंह के वेतन पर रोक लगा दी है। कोर्ट रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अरविन्द सिंह की नियुक्ति से संबंधी सभी मूल दस्तावेज तलब करते हुए प्रमुख सचिव नियुक्ति से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कोर्ट प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में छेड़छाड़ पर नाराजगी भी जताई है।
डॉ. महेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अरूण टंडन और सुनीता अग्रवाल ने याची के वकील को सुनकर पारित किया। याचिका में कहा गया है कि अरविन्द सिंह रिटायर्ड आईएएस अधिकारी है। कोआपरेटिव सोसायटी एक्ट के सेक्शन 31 (ए) के अनुसार इस पद पर प्रथम श्रेणी का अधिकारी ही राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किया जाएगा, जबकि अरविन्द सिंह रिटायर हो चुके हैं।
राज्यपाल ने 16 मई 2016 को विशेष कार्याधिकारी का पद सृजित किया, इसके साथ ही कहा कि वह 6 माह के लिए पदेन प्रबंध निदेशक रहेंगे। जबकि, आयुक्त एवं निबंधक सहकारी समिति ने 16 अगस्त 2015 को आदेश दिया है कि किसी भी सेवानिवृत्त कर्मचारी और अधिकारी से 60 वर्ष की आयु के बाद काम न लिया जाए।

कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल जब भी पद का सृजन करें उनके समक्ष शैक्षिक अर्हता, चयन प्रक्रिया और वेतनमान भी राज्य सरकार रखे। इसके बाद ही पद का सृजन किया जाए। प्रमुख सचिव नियुक्ति द्वारा दी गई जानकारी में कोर्ट ने पाया कि दस्तावेजों में छेड़छाड़ की गयी है तो अरविंद सिंह के वेतन पर रोक लगाते हुए नियुक्ति संबंधी दस्तावेज तलब कर लिए हैं। याचिका पर 12 जुलाई को सुनवाई होगी।

News@2:नोएडा के सीईओ रमारमण के काम करने पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले छह वर्षां से नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आईएएस. रमारमण के पद पर कार्य करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि कई योग्य अधिकारियों के बावजूद एक ही अधिकारी को तीन प्राधिकरणों का सीईओ क्यों नियुक्त किया गया है। कोर्ट ने रमारमण के तबादले के प्रश्न पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित बोर्ड को दो हफ्ते में निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से इस सबंध में लिये गए निर्णय पर हलफनामा मांगा है। याचिका की सुनवाई 20 जुलाई को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरूण टंडन और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने अखिल भारतीय मानव कल्याण सेवा संस्थान व जितेन्द्र कुमार गोयल की जनहित याचिका पर दिया है। प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय व नोएडा के अधिवक्ता एम.सी.चतुर्वेदी ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की किन्तु कोर्ट ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आपत्ति अस्वीकार कर दी और स्वप्रेरित कार्यवाही करते हुए सख्त फैसला लिया। कोर्ट ने कहा है कि सीईओ कैडर पोस्ट है।
कोर्ट ने कहा कि अथारिटी में यादव सिंह जैसे कई अधिकारियों के खिलाफ भूमि आवंटन घोटाले की शिकायतों के बावजूद एक ही अधिकारी को छह साल से तीन प्राधिकरणों का सीईओ तैनात रखने का गंभीर मुद्दा है। कोर्ट ने एक अधिकारी के तीन प्राधिकरणों का हेड बनाने पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने कहा कि सरकार को पक्षपातपूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए। उसके कामों में पारदर्शिता होनी चाहिए। कोर्ट लम्बे समय से तैनात अधिकारी का तबादला करने को सरकार को कहता किन्तु कई माह पहले ही कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में निर्देश दिया था। एक अधिकारी की ही तीन पदों पर तैनाती का कोई औचित्य नहीं है। घोटाले के आरोप वाले प्राधिकरण में ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। याचिका की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।
News@3: लघु उद्योग विकास निगम में आउट सोर्सिंग से कर्मी रखने पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी लघु उद्योग विकास निगम में आउट सोर्सिंग से श्रमिक उपलब्ध कराने के ठेके के तहत कार्य करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव से प्रकरण की स्वयं जांचकर नियमानुसार कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। साथ ही की गई कार्यवाही की रिपोर्ट मांगी है। याचिका की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरूण टंडन और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने बोधिसत्व समाज कल्याण की जनहित याचिका पर दिया है। मालूम हो कि अक्टूबर 2014 में शासनादेश जारी कर विभिन्न सरकारी विभागों में आउट सोर्सिंग पर कर्मचारियों की नियुक्ति कर काम लेने की अनुमति दी। लघु औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध निदेशक ने विज्ञापन निकाला। 14 वेंडरों ने आवेदन दिया, जिसमें से 9 वेंडर अयोग्य पाए गए।
5 वेंडरों को आमंत्रित किया गया। कोर्ट ने प्रमुख सचिव को इस संबंध में हलफनामे के साथ तलब किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि निगम के प्रबंध निदेशक द्वारा प्रक्रिया पूरी की गयी है। याचिका में ठेका देने में मनमानी का आरोप लगाया गया है और कहा है कि कर्मचारियों की तैनाती में घोटाला हुआ है। जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया है और बरती गयी अनियमितता पर कार्यवाही करने का आदेश दिया है। याचिका की सुनवाई 18 जुलाई को होगी।

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