लाल मिर्च में ईंट तो दूध में यूरिया की मिलावट, यूं हो रहा आपकी सेहत से खेल

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मुंबई/नागपुर.देश में बड़े से बड़े स्टोर से लेकर आम किराना दुकान तक मिलने वाले सामान कहीं पर भी मिलावट से मुक्त नहीं है। वर्तमान में मिलावट के मामले में देश के टॉप ब्रांड भी फेल हो चुके हैं। ऐसे में यह समस्या किसी महामारी की तरह फैल रही है। मिलावट करने वाले हल्दी में रंग, काली मिर्च में पपीते के बीज, लाल मिर्च में ईंट का चूर्ण, दाल-चावल में कंकड़, सरसों के तेल में केमिकल, घी में पशुओं की चर्बी तक मिलाई जा रही है। apnaallahabad.com अपने पाठकों को मिलावट के इस गोरखधंधे से जुड़ी सुनी-अनसुनी बातों से रूबरू करा रहा है। दूध में ऐसे होती है मिलावट…
दूध में यूरिया, सर्फ, स्टार्च…
-दूध में अब केवल पानी ही नहीं मिलाया जा रहा है। इसमें ज्यादातर पानी, यूरिया, सर्फ, स्टार्च आदि चीजों की मिलावट की जाती है।
– इसमें मिलावट की जांच के लिए लैक्टोमीटर इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर लैक्टोमीटर 30 यूनिट से ज्यादा डूब जाता है, तो इसका मतलब दूध में पानी या पाउडर मिला हुआ है।
– दूध में पानी के मिलावट की जांच करने को किसी चिकनी लकड़ी की सतह पर दूध की एक या दो बूंदें टपकाकर देखिए। अगर दूध बहता हुआ नीचे की तरफ गिरे और सफेद धार-सा निशान बन जाए तो दूध शुद्ध है।
– दूध और मावे के साथ अन्य डेयरी उत्पादों में भी मिलावट होती है। मावे की जांच के लिए सैंपल लेकर टेस्ट ट्यूब में भरें और उसमें 20 एमएल पानी डाल कर उबालें। ठंडा होने पर इसमें दो बूंद आयोडीन डालें। अगर सैंपल का रंग नीला हो जाए तो इसमें स्टार्च मिला हुआ है।
भारत में तीन में से दो लोग यूरिया वाला दूध पी रहे हैं
केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन द्वारा 28 मार्च 2016 को दिए एक बयान के मुताबिक, भारत के तीन में से दो नागरिक डिटर्जेंट, कॉस्टिक सोडा, यूरिया और पेंट वाला दूध पीते हैं। देश में बिकने वाला 68 प्रतिशत दूध देश की खाद्य उत्पाद नियंत्रक संस्था एफएसएसएआई के मापदंडों पर खरा नहीं उतरता।

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